दोष मुक्त 

House of Prayer
Apr 22 · 1 minute read

अजीत कुमार 

परमेश्वर की बुलाहट हम सब  के जीवन में है। वह लोग जो बुलाहट सुनकर, उत्तर देते हैं, जो परमेश्वर की आवाज और उसके तरीकों को पहचानते हैं, उन लोगों को परमेश्वर और ज्यादा पुकारते हैं, और ज्यादा बातें बताते हैं एवं और ज्यादा निर्देश देते हैं- सच मायने मे वह बुलाए गए हैं परमेश्वर की संतान। 

यह हम जानते हैं क्योंकि बाइबल हमें ऐसा बताती है। बाइबल यह भी बताती है कि हम कैसे एक ऐसा जीवन जिए जो परमेश्वर को प्रसन्न करता है। एक ऐसा जीवन जिसका नींव ही सुसमाचार हो, जैसा जीवन परमेश्वर यीशु ने 2000 साल पहले जिया। सही मायनों में यह हमारे जीवन से बहुत पहले के समय से ही हमे चुन लिया गया था, इस संसार की नींव भी डालने से पहले, यह भी हमें मालूम है। जैसा उस ने हमें जगत की उत्पति से पहिले उस में चुन लिया, कि हम उसके निकट प्रेम में पवित्र और निर्दोष हों। इफिसियों 1:4 प्रेरित पौलूस इस वचन में क्या कहना चाहते हैं जब वह कहते हैं कि हम परमेश्वर के प्रेम में पवित्र और निर्दोष पाए जाएंगे। जैसा कि हम निरंतर सुनते आए हैं कि परमेश्वर का पुनरागमन निकट है और  कैसे कलीसिया को एक पवित्र दुल्हन जैसे तैयार होना आवश्यक है।  क्या है यह बुलाहट जो हमें पवित्र और निर्दोष पाए जाने के लिए बुलाती है?  आईए इसे गहराई से जानें। 

परमेश्वर की संतान को पाप के ऊपर जयवंत जीवन जीना चाहिए। एक ऐसा जीवन , जो पाप के प्रभाव  से निकल कर पूरी तरह से परमेश्वर  यीशु  को समर्पित हो और पवित्र आत्मा द्वारा नियंत्रित और चलाया जा रहा हो।  हम यह भी जानते हैं कि एक जयवंत जीवन एक परमेश्वर की संतान को,  जो मेमने के लहू से धुला हुआ है, सांस लेने जैसा साधारण है। जैसे की पौलूस गलातियों 2:20 वे कहते हैं कि यह पाप के ऊपर जयवंत जीवन वह लोग जो कि यीशु मसीह में है स्थिर रूप से देख सकते हैं। गलातियों 2:20 मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूं, और अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है: और मैं शरीर में अब जो जीवित हूं तो केवल उस विश्वास से जीवित हूं, जो परमेश्वर के पुत्र पर है, जिस ने मुझ से प्रेम किया, और मेरे लिये अपने आप को दे दिया। क्या ही शक्तिशाली बयान है! क्या शक्तिशाली गवाही है!!

पौलुस ये कौन से जीवन के बारे में बता रहा है जो वह शरीर में जी भी रहा है। एक ऐसा जीवन जो वह पहचान रहा है और सही से व्याख्या भी कर रहा है। हां एक जीवन है जो हम शरीर में जीते हैं, और एक वह जीवन भी है जो हम विश्वास में और पवित्र आत्मा से भरे हुए जीते हैं। हालेल्लुय्या! क्योंकि यीशु हम में जीवित हैं हम अपने शरीर पर भी जयवंत हैं, और यह जीवन हमें परमेश्वर के पुनरागमन तक जीना है। और वही हमारी जीवित आशा है, परमेश्वर का पुनरागमन, परमेश्वर की स्तुति हो, परमेश्वर के मेमने की स्तुति हो। 

तो सवाल यह है कि हम पाप पर जयवंत कैसे हो सकते हैं?

निश्चित एक समाधान यह है कि हम परमेश्वर की आवाज को, पवित्र आत्मा की अगुवाई से, जो हम में जीवित है, उसके प्रोत्साहन को सुने और अनुसरण करें।  परमेश्वर की आज्ञा माने जब वह पवित्र आत्मा के द्वारा आपसे बात करते हैं। आज्ञाकारी होने के लिए हमें परमेश्वर की आवाज को पहचानना है और पवित्र आत्मा में चलने वाले व्यक्ति उस आवाज को स्वाभाविक रूप से पहचान सकते हैं, उसे सुन सकते हैं, उसका अनुसरण कर सकते हैं। 

मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं, और मैं उन्हें जानता हूं, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं। यूहन्ना 10:27 

यदि किसी को इसमें और आश्वासन यह सफलता की आवश्यकता है तो वह परमेश्वर से मांगे, वह आपको देंगे। या कलीसिया के अगवोंओं से मिले, वह जब आप पर हाथ रख कर प्रार्थना करेंगे तो आप परमेश्वर यीशु को ग्रहण करेंगे और पवित्र आत्मा का अभिषेक पाकर परमेश्वर की आवाज को सुनेंगे। आमीन।

क्षमा प्राप्त करना अकेले ही हमें पाप से आजादी नहीं देता। वह तो सिर्फ शुरुआत है। यूहन्ना 8:10 मैं हम पढ़ते हैं जब फरीसी एक स्त्री को व्यभिचार करते हुई पकड़ कर लाए थे तो प्रभु यीशु ने उस स्त्री से कहा,   “हे नारी, वे कहां गए? क्या किसी ने तुझ पर दंड की आज्ञा न दी।“ उस ने कहा, “हे प्रभु, किसी ने नहीं” यीशु ने कहा, “ भी तुझ पर दंड की आज्ञा नहीं देता; जा, और फिर पाप न करना।“ (यूहन्ना 8:10 & 11) परमेश्वर ने यहां माफ किया और एक आज्ञा भी दी कि फिर पाप ना करना।

पापों से क्षमा ही है परमेश्वर में एक नए जीवन की शुरुआत जहां हमारे सब किए हुए पाप क्षमा हो जाते हैं और उस समय से शुरुआत होती है नए जीवन की।  और उसके साथ एक नई आज्ञा है “और पाप ना करना”।  हमें दोष रहित जीवन देने में शक्ति देता है फिर वही एक आज्ञा  “और पाप ना करना”। यही वह अनंत आवाज है, जो इतिहास से परमेश्वर के हर संतान के कान मे गूंजती हुई आ रही है, एक ऐसी प्रोत्साहन, कि परमेश्वर की हर संतान पाप के प्रति सतर्क रहें और उसे पाप करने से रोकती है ताकि वह एक ऐसा जीवन जी सके जो दोष रहित हो और परमेश्वर के पुनरागमन तक दुल्हन तैयार और दोष मुक्त रहें। 

पौलूस गलातियों 2:20 मे कहते हैं मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूं, और अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है: और मैं शरीर में अब जो जीवित हूं तो केवल उस विश्वास से जीवित हूं, जो परमेश्वर के पुत्र पर है, जिस ने मुझ से प्रेम किया, और मेरे लिये अपने आप को दे दिया।

इसलिए यही है विश्वास का जीवन, विश्वास हमे सिखाता है कि पाप नही करना। ( तीतुस 2:12) और हमें चिताता है, कि हम अभक्ति और सांसारिक अभिलाषाओं से मन फेर कर इस युग में संयम और धर्म और भक्ति से जीवन बिताएं। तो यह संभव है कि हम एक ऐसा जीवन जीयें, और पवित्र आत्मा हमें  ऐसे जीने में मदद करती हैं।

ध्यान रहे यह जीवन जो पवित्र आत्मा से भरा हुआ है जो धार्मिकता से भरा हुआ है उसने अपने हर एक शिष्य के लिए चुना हुआ है। और उनके लिए जो जब परमेश्वर की आवाज को सुनते हैं और उसका अनुसरण करते हैं विश्वास और आत्मा में आज्ञाकारी बनते हैं, तो दोष मुक्त होने के लिए आज्ञाकारी होना मुख्य है।

पहला है परमेश्वर की आवाज में सुनना और दूसरा है आज्ञाकारी होना। 

धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं, क्योंकि वे तृप्त किये जाएंगे। (मत्ती 5:6) 

एक दोष मुक्त जीवन वह जीवन है जो परमेश्वर यीशु के जीवन के छवि के अनुरूप है। अनुरूपण पूर्ण नहीं है जब तक प्रभु का प्रताप हम पर प्रकट न हो जैसा कि वचन, 2 कुरिन्थियों 3:18, मैं लिखा है। “परन्तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं।“ क्योंकि अब परमेश्वर की संतान हैं आप उस आवाज को सुन सकते हैं, उसको पहचान सकते हैं, उसका अनुसरण कर सकते हैं और उसका उसकी आज्ञा मान सकते हैं। मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं, और मैं उन्हें जानता हूं, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं।(यूहन्ना 10:27) 

हम कब परमेश्वर को निहारने वाले? परमेश्वर के पुनरागमन पर!

जैसे परमेश्वर की महिमा उतरेगी तब हम उसकी छवि में रूपांतरित हो जाएंगे हैं। अब तक हम ऐसे हैं जैसे कार्य प्रगति पर है। और फिर जैसे हम उन परमेश्वर के साथ जीते हैं तो, जिसे वचन कहता है, हम ऐसे दास होंगे जो परमेश्वर के मंदिर में खंभे होंगे। 

जो जय पाए, उस मैं अपने परमेश्वर के मन्दिर में एक खंभा बनाऊंगा; और वह फिर कभी बाहर न निकलेगा; और मैं अपने परमेश्वर का नाम, और अपने परमेश्वर के नगर, अर्थात नये यरूशलेम का नाम, जो मेरे परमेश्वर के पास से स्वर्ग पर से उतरने वाला है और अपना नया नाम उस पर लिखूंगा।

(प्रकाशित वाक्य 3:12)

 यही परमेश्वर प्रकाशित वाक्य में सात कलीसियाओं को कहते हैं।

यही परमेश्वर का वायदा है कि हम एक पाप के ऊपर जयवंत जीवन जीएं और पवित्र आत्मा की शक्ति से हम परमेश्वर यीशु के समान होते जाएं। 

यही समय है कि परमेश्वर के वचन का अनुसरण करें उनकी खोज में रहे, जब समय है खोजने का। जैसा कि प्रेरितों के काम 5:32 मैं लिखा है “सब बातों के हम साक्षी हैं और वैसे ही वह पवित्र आत्मा भी है जिसे परमेश्वर ने उन्हें दिया है जो उसकी आज्ञा का पालन करते हैं।” क्योंकि परमेश्वर में हमारा जीवन है, और परमेश्वर से हमारा जीवन है, परमेश्वर के द्वारा हमारा जीवन है, और परमेश्वर के लिए हमारा जीवन है। परमेश्वर आपको अपने पुत्र यीशु द्वारा, पवित्र आत्मा की शक्ति में आपको सामर्थ्य देता कि आप “दोष रहित” जीवन जी पाए। 

आमीन!

अनुवादक : डा. प्रशांत

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