दबाव, दृढ़ता की जननी है।

House of Prayer
Sep 22 · 1 minute read

प्रारंभिक प्रमाण क्या है कि आप पवित्र आत्मा से भरे हुए हैं और आपको सेवकाई के लिए बुलाया गया है ? परेशानियां – यदि आपका व्यक्तित्व और आत्मिक जीवन तूफान में फंसने और उसका सामना करने के लिए दुष्चक्र में फंसा लगता है, तो याद रखें कि आपके पास एक बुलाहट है और परमेश्वर ने आपका अभिषेक किया है।
एक प्रेरित की बुलाहट की पहचान तब होती है, जब वह दृढ़ता से खड़ा रहता है। जबकि उसके आसपास बहुत से लोग कई दबाव और निराशा के कारण गिर जाते हैं। अगर आप खड़े हुए लोगों में हैं तो परमेश्वर के पास आपके लिए एक बुलाहट है। परमेश्वर ने आपको उसके राज्य की महिमा करने के लिए और उद्देश्य पूर्ण करने के लिए तैयार किया है। परमेश्वर ने आत्मिक युद्ध के विषय में ठीक यही कहा है।
इफिसियों 6:13-14 इसलिए परमेश्वर के सम्पूर्ण कवच को धारण करो ताकि जब बुरे दिन आयें तो जो कुछ सम्भव है, उसे कर चुकने के बाद तुम दृढ़तापूर्वक अडिंग रह सको। सो अपनी कमर पर सत्य का फेंटा कस कर धार्मिकता की झिलम पहन कर तथा पैरों में शांति के सुसमाचार सुनाने की तत्परता के जूते धारण करके तुम लोग अटल खड़े रहो ।
यहां ‘बुरा दिन’ किसी भी क्षण होने वाले आत्मिक हमले के बारे में बताता है। परमेश्वर की संतान होने के नाते यह आवश्यक है कि हम इस आत्मिक युद्ध के ऊपर विजय पाएं । अशांत और कठिन समय से गुजरने के बाद यदि आप अभी भी खड़े हैं तो यह केवल उस सामर्थ्य के कारण है जो परमेश्वर प्रदान करते हैं। लेकिन दृढ़ खड़ा रहने के लिए हमारे पास 2 गुण होना आवश्यक है। ईमानदारी और धार्मिकता । क्योंकि हम मानव जाति हैं, इसलिए हमेशा धार्मिकता और ईमानदार बने रहना असंभव है। परमेश्वर ही हमें यह प्रदान कर सकता है कि हमारे पुराने स्वभाव को तोड़कर हमें अपने स्वरूप में ढाल देता है।
यहूदा 1:24 अब उसके प्रति जो तुम्हें गिरने से बचा सकता है तथा उसकी महिमापूर्ण उपस्थिति में तुम्हें महान आनन्द के साथ निर्दोष करके प्रस्तुत कर सकता है।
केवल परमेश्वर ही हमें ठोकर खाने से बचा सकता है। वह हमें निराशा और प्रलोभनों पर विजय पाने के लिए अनुग्रह देगा। जिसके कारण हम उसकी महिमामय उपस्थिति में निर्दोष खड़े रह सकेंगे – निर्दोष और निष्कलंक । कुलोसियों 1:22 किन्तु अब जब मसीह अपनी भौतिक देह में था, तब मसीह की मृत्यु के द्वारा परमेश्वर ने तुम्हें स्वयं अपने आप से ले लिया, ताकि तुम्हें अपने सम्मुख पवित्र, निश्कलंक और निर्दोष बना कर प्रस्तुत किया जाये। इसके अलावा वह हमें अत्याधिक आनंद से भर देगा ।
जब परमेश्वर हमारा हाथ पकड़ता है तो वह थामें रखता है। चाहे कुछ भी हो जाए, वह जाने नहीं देगा। कभी-कभी पकड़ बहुत ज्यादा सख्त या इतनी जोरदार हो सकती है कि उससे दर्द और हताशा हो जाती है। अक्सर हम उसका हाथ पकड़ने की कोशिश करते, जिससे हमारी पकड़ ढीली हो जाती है और हम बिल्कुल अकेले हो जाते हैं। वह हम पर पकड़ बनाए रखता है, भले ही वह दर्द या हताशा का कारण जो हमारे अकेले रहने से कहीं अधिक अच्छा है।
परमेश्वर इन तूफानों को हमारे जीवन में क्यों आने देता है भजन संहिता 4:1 मेरे उत्तम परमेश्वर, जब मैं तुझे पुकारुँ, मुझे उत्तर दे। मेरी विनती को सुन और मुझ पर कृपा कर। जब कभी विपत्तियाँ मुझको घेरें तू मुझ को छुड़ा ले। इस वचन को अक्सर गलत समझा जाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि जब आप संकट में होते हैं, तो परमेश्वर आपको अगले पल राहत दे देते हैं। दाऊद एक दुविधा (नैतिक और आत्मिक) से गुजर रहा था, जब उसने अचानक दो पाप किए: व्यभिचार और हत्या। परंतु परमेश्वर ने उसके पास एक नबी भेजा और उसके पापों को प्रकट किया। तुरंत वह अपराध भावना और दुख से भर गया और उसने पश्चाताप किया। फिर भी उसे अपने कार्यों के लिए परिणाम भुगतने पड़े। उसे अपने पुत्र अबशालोम के डर से अपने घर से भागना पड़ा। जो उसके साथ रोटी तोड़ते थे वे उसे कोसते और विरोध करते हुए उसके पीछे-पीछे दौड़े। अपने जीवन के लिए भागने और भयानक आक्रोश को झेलने के बाद दाऊद के लिए इजाफा लाया गया। यहां तक कि जब दाऊद अपने प्राणों के लिए भाग रहा था, तब भी परमेश्वर उसके जीवन में कार्य कर रहे थे। परमेश्वर उसके हृदय में बदलाव लाएं ताकि परमेश्वर उसके विषय में गवाही दे सकें कि वह ‘परमेश्वर के दिल के अनुसार है। दबाव दृढ़ता पैदा करता है। परमेश्वर को हमारे बारे में ऐसी गवाही होने के लिए हम जीवन आराम अवस्था में नहीं जी सकते। हो सकता है, हम इन दिनों अपने आसपास किसी के डर से छुपे हों। फिर भी परमेश्वर हमें कृपा दे रहे हैं और हमारा हाथ पकड़ रहे हैं ताकि हम मजबूती से खड़े हो सकें । अभी हम जिस अवस्था से गुजर रहे , हो सकता है कि वह हमारे अपने कार्यों के परिणाम हों। परंतु फिर भी परमेश्वर इसे हमारे खिलाफ इस्तेमाल नहीं कर रहा लेकिन हमारे लिए इस्तेमाल कर रहा है, जिससे परमेश्वर हमारे हृदय में समाधान ला सकें और हमें अपने ‘दिल के अनुसार’ बुला सकें।
परमेश्वर‌ ने हमें असफलताओं से गुजरने दिया है। उन्होंने हमें दुख की घाटी में चलने की इजाजत दी है। प्रतिदिन परिवारों और घरों, विशेषकर मसीही लोगों पर आत्मिक हमले होते हैं। यह एक असंख्यक तरीकों से प्रकट होते हैं जैसे : अधीरता, बेईमानी, खराब संचार, एक दूसरे को हल्के से लेना इत्यादि। जबकि यह भी परमेश्वर की अज्ञानता में नहीं है। यहां अंततः एक बड़ा उद्देश्य है जो पूर्ण होना है। परमेश्वर कलीसिया को परिवारों और घरों की मरम्मत के लिए बुला रहा है, जिससे परिवारों को परमेश्वर की महिमा के लिए इस्तेमाल किया जा सके। अक्सर हम आत्मिक रूप से नीरस महसूस करते हैं हम परमेश्वर के उद्देश्य को देखने में असमर्थ है और कई बार अपनी बुलाहट पर भी संदेह करते हैं। लेकिन उसी क्षण परमेश्वर हमारा उपयोग दूसरे के घावों को भरने के लिए करते हैं। परमेश्वर चाहते हैं कि हम समझ ले कि जब हम घायल हो जाते हैं, तब हम दूसरों के घावों में चंगाई के लिए प्रयोग हो सकते हैं। हर तूफान के लिए एक कारण, उसमें एक योजना है। परमेश्वर इसलिए तूफान को अनुमति नहीं देते कि वह आपको शर्मिंदगी महसूस कराना चाहते हैं। परंतु इसलिए कि वह आपके हृदय को खोल रहे हैं, तूफान का सामना करने में आपकी मदद कर रहे हैं और दूसरों को चंगा करने के लिए आपको उपयोग कर रहे हैं। जब परिवार टूटते हैं तो चाहे वह अलगाव हो या तलाक, यह एक अपमान है। हर तरह के दुर्व्यवहार और लगातार लड़ाई को देखना, बच्चों पर बुरा असर डालता है। फिर भी परमेश्वर इन बच्चों को शक्तिशाली तरीके से उपयोग करते हैं।
इस तरह का समाधान कैसे किया जाता है? पहले हमें अपनी असफलताओं को स्वीकार कर पश्चाताप करना चाहिए (अपने पापों को त्यागकर मन फिराएं) अगर हमने उन लोगों को माफ कर दिया है, जिन्होंने वर्षों पहले हमारे साथ अन्याय किया था, तो यह एक संकेत है कि उसने हमारे दिल को बड़ा कर दिया है। यदि नहीं तो हमें एक लंबा रास्ता तय करना होगा।
व्यवस्थाविवरण 8:15-16 यहोवा तुम्हें विशाल और भयंकर मरुभूमि से लाया। जहरीले साँप और बिच्छु उस मरुभूमि में थे। जमीन शुष्क थी और कहीं पानी नहीं था। किन्तु यहोवा ने चट्टान के नीचे से पानी दिया। मरुभूमि में यहोवा ने तुम्हें मन्ना खिलाया, ऐसी चीज जिसे तुम्हारे पूर्वज कभी नहीं जान सके। यहोवा ने तुम्हारी परिक्षा ली। क्यों? क्योंकि यहोवा तुमको विनम्र बनाना चाहता था। वह चाहता था कि अन्ततः तुम्हारा भला हो। इस्राएलियों को रेगिस्तान में बिना पानी और भोजन और जहरीले सांपों के बीच से ले जाया गया, ताकि परमेश्वर उन्हें पानी और मन्ना दे सके। हम में से कोई भी परीक्षण और परीक्षा पसंद नहीं करता। लेकिन परीक्षा देने के बाद ही तो हमें ‘ग्रेड’ प्राप्त होता है। परमेश्वर हमें नम्र करता है और हमारी परीक्षा करता है, ताकि अंत में वह हमें उस तरह से ऊपर उठाए जैसे वह चाहता है। हालांकि परमेश्वर ने इस्राएलियों को दीन किया और उनकी परीक्षा ली, लेकिन परमेश्वर की इस योजना के द्वारा परिणाम बहुत अच्छा था। जब इस्राएलियों ने खाने के लिए और परमेश्वर के विरुद्ध कुडकुडाने के लिए मुंह खोला तो उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा। परीक्षा हमें ‘सही और गलत’ साबित करती है और विनम्र करती है।
भजन संहिता 102:23 मेरी शक्ति ने मुझको बिसार दिया है। यहोवा ने मेरा जीवन घटा दिया है।
अक्सर हम सामर्थ पाने के लिए प्रार्थना करते हैं तो परमेश्वर हमसे पूछते हैं “क्या आप वास्तव में इसका मतलब समझते हैं?” अगर हम परमेश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और अधीनता में कमजोर महसूस करते हैं तो परमेश्वर हमें चंगा करेगा। आजकल जब हम बीमार होते हैं तो हम अस्पताल जा सकते, विशेषज्ञ की सलाह ले सकते हैं, और दवाइयां दे सकते हैं। कुछ सालों पहले परमेश्वर के ऐसे बच्चे थे जिन्होंने सेवकाई की शुरुआत सिर्फ विश्वास द्वारा की, जो उनकी संपत्ति था। प्रत्येक भोजन के लिए और बीमारी की चंगाई के लिए वह पूर्ण रुप से परमेश्वर पर निर्भर रहते थे। ना उनके पास बैंक में पैसा था, ना ही चिकित्सा बीमा। हालांकि उसमें से कुछ लोग मृत्यु द्वारा परमेश्वर के पास रहने चले गए, परंतु अधिकांश लोग गंभीर बीमारी से बचे रहे और उनकी लंबी उम्र थी। हम बीमारी को वाहन के रूप में भी देख सकते हैं, जो हमें परमेश्वर के घर ले जाने में मदद करता है। यह हमें तैयारी के महत्व को स्वीकार करने का आग्रह करता है – पश्चाताप और विश्वास के द्वारा।
2 कुरिन्थियों 12:19 तुम क्या यह सोच रहे हो कि एक लम्बे समय से हम तुम्हारे सामने अपना पक्ष रख रहे हैं। किन्तु हम तो परमेश्वर के सामने मसीह के अनुयायी के रूप में बोल रहे हैं। मेरे प्रिय मित्रो! हम जो कुछ भी कर रहे हैं, वह तुम्हें आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली बनाने के लिए है। क्या आप पूर्ण रूप से परमेश्वर पर भरोसा करने और कष्ट सहने के लिए तैयार है? परमेश्वर ने हमसे वायदा किया है कि उसका अनुग्रह हम पर पर्याप्त है। उनकी कृपा हमारे लिए किसी भी पीड़ा को सहने के लिए पर्याप्त है। अगर हम उनके साथ आने वाली परीक्षाओं का सामना करने के लिए तैयार हैं, तो वह हमें अपनी शक्ति और सामर्थ्य देगा। क्या आप केवल अपनी समस्याओं का समाधान ही चाहते हैं या आप चाहते हैं कि आपके जीवन को संपूर्ण करे ।
2 कुरिन्थियों 12:5 हाँ, ऐसे मनुष्य पर मैं अभिमान करूँगा किन्तु स्वयं अपने पर, अपनी दुर्बलताओं को छोड़कर अभिमान नहीं करूँगा।
अपनी कमजोरियों के बारे में शेखी बघारना तो दूर की बात है, हम से कितने लोग हैं जो कमजोरियों को स्वीकार करने का साहस रखते हैं? हम में से अधिकांश लोग ऐसा नहीं करते हैं, क्योंकि हम कमजोरियों को अपमान की निशानी के रूप में देखते हैं। हम सोचते हैं कि लोग हमारे बारे में क्या सोचेंगे और हम जिस परमेश्वर की सेवा करते हैं उसके बारे में ? जब हम बाहें फैलाकर प्रार्थना करते हैं तो एक बार यह सोचे हैं कि हमारे मन शुद्ध और पवित्र है? पहला कदम होता है हमारी कमजोरियों को स्वीकार करना – ‌जो हमारी क्रोध या अनसुलझी चोट को हृदय में रखना हो सकता है। अगर इन कमजोरियों को नजर अंदाज किया जाए तो यह कई रूप तरह से प्रकट हो सकती है और हमारे जीवन को बदसूरत बना सकती है। तब हमारे बुरे अंशों और कमजोरियों के साथ अपने अच्छे अंशों को भी परमेश्वर को समर्पित करना चाहिए।
पत्नियों, पति का सम्मान । वह घर का मुखिया है उसका सर दूसरों के सामने झुकने ना दे / ऊंचा उठाए, यह आपकी जिम्मेदारी है। बाइबल ऐसी पत्नियों को सक्षम बुद्धिमान और गुणी के रूप में दर्शाती हैं। पतियो अपनी पत्नी को वैसा प्रेम करो जैसा परमेश्वर अपने बच्चों से करता है – ‘अगापे’ प्रेम या निस्वार्थ बलिदान और बिना शर्त का प्रेम । जब हम, बदले में कुछ प्राप्त किए बिना किसी से प्रेम करते हैं, तो दर्द होता है। लेकिन यह हम इसलिए करते हैं क्योंकि परमेश्वर ने हमसे निस्वार्थ, बलिदान वाला और बिना शर्त का प्रेम किया है।

अनुवादक : अचला कुमार

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