क्या परमेश्वर इस महामारी का उपयोग हमारी भलाई के लिए कर सकते हैं?

House of Prayer
Mar 22 · 1 minute read

संपूर्ण संसार एक भयानक और दयनीय स्थिति में है। इस महामारी ने हम सबके लिए अव्यवस्था और दहशत पैदा कर दी है। हर दिन, हम लोगों के कष्टों और मृत्यु के विषय में सुन रहे हैं। तथापि, परमेश्वर की संतान होने के कारण हम आश्वस्त हो सकते हैं कि परमेश्वर हमारी भलाई के लिए इस महामारी का भी उपयोग कर सकते हैं। और पवित्र शास्त्र बाइबल भी यही कहता है रोमियो की पुस्तक, 8:28 में “और हम जानते हैं कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं उनके लिए सब बातें मिलकर भलाई को ही उत्पन्न करती हैं। अर्थात उन्हीं के लिए जो उसके इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। परमेश्वर हर अवसर का उपयोग हमें परिपक्व करने, आगे बढ़ाने और हम में अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए करता है। जिसे दूसरे लोग जीवन में एक आपदा के रूप में देखते हैं परमेश्वर हमारे भले के लिए उपयोग करने का वादा करते हैं। अर्थात त्रासदिओं, बीमारियों, नुकसान, असफलताओं और पीड़ा का उपयोग हमारे अच्छे के लिए किया जाना। आइए हम कुछ अच्छी बातों पर नजर डालें जो परमेश्वर इस महामारी की स्थिति में कर सकते हैं। इससे पहले यह विषय समझे, बाइबल की 2 बुनियादी सच्चाईयों को समझना आवश्यक है :

  1. यह समझना जरूरी है कि हम पाप से  प्रभावित संसार में रहते हैं। पाप के परिणाम के कारण यह संसार भी शारीरिक रूप से बीमार है। यद्यपि यह परमेश्वर का इरादा नहीं था कि उनकी सृष्टि इतनी पीड़ित हो। परंतु यह उस पाप का परिणाम है जिसे मनुष्य ने अपनी इच्छा से चुना जिसने हमें पवित्र परमेश्वर से अलग कर दिया। संपूर्ण बाइबलिय इतिहास में परमेश्वर दर्द, पीड़ा, आपदा, युद्ध और कई तरह की परीक्षाओं का उपयोग करते हैं, हमें यह याद दिलाने के लिए कि हम पापी है और हमें उद्धार की आवश्यकता है। परमेश्वर नें हमें उद्धार दिलाने के लिए, हमारे पापों के कारण स्वयं क्रूस पर कष्ट को सहा।

परमेश्वर नें इस महामारी को होने की अनुमति दी है जिससे उनकी महिमा प्रकट हो सके और जो उन पर विश्वास रखते हैं, उनको याद दिलाना और विश्वास में बहाल करना।

2. हमें पूर्ण विश्वास करना चाहिए कि परमेश्वर किसी भी ‘श्राप’ को ‘आशीर्वाद’ में बदल सकते हैं। लेकिन से गुजरे इस महामारी को आशीष कैसे समझा जा सकता है जबकि इसने हजारों लोगों की जान ले ली और इसके द्वारा लोग कष्ट हें? अगर आप कैंसर से चंगाई पाए हुए लोगों से पूछे तो वह आपको बताएंगे की कैसे उनकी कैंसर की बीमारी उनके जीवन में आशीष का कारण बन गई। वह इस तरह गवाही देंगे की “कैंसर ने हमें नम्र किया और हमें घुटनों पर खड़ा रहना सिखा दिया।“ “इस बीमारी ने मेरे विश्वास को परिपक्व और मजबूत करने में मदद की।“

“ इसने मुझे आश्वस्त किया कि इस बीमारी से लड़ने के मेरे अपने सभी प्रयास व्यर्थ थे और मैं पूरी तरह से परमेश्वर की दया पर निर्भर था।“ हमारा परमेश्वर एक शक्तिशाली परमेश्वर है। वह आपके लिए हर चीज को एक महान आशिष में बदलने की शक्ति रहता है। उसके लिए कुछ भी कठिन नहीं ‌है। 

वचन की इन दो बुनियादी बातों के आधार पर आइए हम कुछ ऐसे तरीकों पर विचार करें जिनसे परमेश्वर इस महामारी की स्थिति को हमारे लाभ के लिए उपयोग कर सकता है:

महामारी हमें सरकारों और आंकड़ों की जगह पर परमेश्वर से समाधान पाने के लिए प्रेरित करती है।

चिकित्सक आंकड़ों के अनुसार हम सब इसी धारणा में थे कि यह वायरस मुख्य रूप से बुजुर्गों को प्रभावित करेगा। उन्होंने यह दावा किया था कि एक बार टीका लगाने के बाद हम वायरस संक्रमण से प्रतिरक्षित हो जाएंगे। लेकिन सत्य तो चिकित्सक विज्ञान से काफी अलग है। हमारा भरोसा और साहस सरकारों और आंकड़ों से नहीं परंतु परमेश्वर से होना चाहिए। आप शायद ऐसे कैंसर रोगियों से परिचित होंगे जो चिकित्सा विज्ञान की भविष्यवाणी के आगे निकल गए और लंबी अवधि तक जीवन जीए। हमारा परमेश्वर आंकड़ों के ऊपर परमेश्वर है। भजन संहिता 139:16 तेरी आंखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे।

यह महामारी हमें जीवन की संक्षिप्तता और मृत्यु की निश्चयता की याद दिलाती है।

किसी ने एक बार ऐसे कहा कि हर इंसान मौत की सजा के साथ पैदा होता है। परमेश्वर हमें हमारी मृत्यु की याद दिलाने के लिए महामारी का उपयोग करते हैं। यह महामारी हमें अनंत काल के जीवन के वायदे के विषय में ज्यादा सोचने की याद दिलाती है क्योंकि यह नश्वर जीवन तो एक भाप के समान है यह जीवन क्षणभंगुर है और मृत्यु के बाद भी जीवन है। 

भजन संहिता 39:4 हे हे यहोवा ऐसा कर कि मेरा अन्त मुझे मालुम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं; जिस से मैं जान लूं कि कैसा अनित्य हूं!

 यह महामारी हमें बीमारी को हराने और जीवित रहने के प्रयास से ज्यादा हमें मसीह को संजोने में मदद करती है।

हम परमेश्वर की सहायता से इस महामारी पर वैसे ही विजय प्राप्त करेंगे जैसे हमने स्पेनिश फ्लू और चेचक से की थी। इस महामारी के दौरान हमारा मिशन केवल जीवित रहना नहीं हो । अगर हम इस संक्रमण को दूर करने में सफल हो जाए तो क्या हमें खुश होना चाहिए? हां बिल्कुल। लेकिन हमें अपनी छाती पीटना नहीं चाहिए और न ही विजय की घोषणा करनी चाहिए कि हमने महामारी को हरा दिया है। हम आने वाले समय में एक और घातक बीमारी, प्राकृतिक आपदा या नश्वर खतरे का सामना करेंगे जो हमें तबाह कर देगा। हमें इस समय का उपयोग मसीह को संजोने और सभी राष्ट्रों के लोगों को चेला बनाने के अपने मिशन में लगे रहने के लिए करना चाहिए।

महामारी हमें कोविड-19 के बारे में सीखने के बजाय परमेश्वर के वचन को पढ़ने में अधिक समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करती है।

अगर आप ‘गूगल’ पर करोनावायरस शब्द को ढूंढते हैं तो आपको इस बीमारी के बारे में ढेर सारे लेख और वीडियो मिल जाएंगे। टीवी और सोशल मीडिया 24 घंटे कोविड-19 की जानकारी प्रदान करता है। क्या वास्तव में हमें इस महामारी पर जानकारी हासिल करने के लिए इतना समय देने की आवश्यकता है? यदि इसका अर्थ परमेश्वर के वचन को पढ़ना छोड़ देना है तो नहीं। अगर हम बाइबिल में खोज करें तो ऐसे सैकड़ों वचन पा सकते हैं जो हमारी वर्तमान स्थिति पर लागू होते हैं। आइए हम इस अवसर का उपयोग परमेश्वर के लिखित वचन के लिए अपने प्रेम को फिर से जगाने के लिए करें। यशायाह 40:8 घास मर जाती है और जंगली फूल नष्ट हो जाता है किंतु हमारे परमेश्वर के वचन सदा बने रहते हैं।

यह महामारी हमें  अलग होने के लिए मजबूर करने के बजाए हमारे रिश्तो को गहरा करने के लिए मौका देती है।

इस वायरस को दूर रखने के लिए हम सभी “सोशल डिस्टेंसिंग” का पालन करते हैं। यह शब्द भ्रामक है। हमें शारीरिक दूरी का पालन करना चाहिए जबकि परमेश्वर ने हमें सामाजिक प्राणी के रूप में बनाया है।

टेक्नोलॉजी ने हमें शारीरिक दूरी का पालन करते हुए भी हमारे संपर्क सूचियों और हमारे प्रभाव क्षेत्र में सभी के साथ संवाद करने में सक्षम बनाया है। आइए हम एक पुराने मित्र के साथ फिर से जुड़े, एक पुराने दुश्मन को माफ कर दें,  टूटे हुए रिश्ते को सुधारें या बस अपने तत्काल परिवार के संबंधों को मजबूत करें। कुलुस्सियों 3:13 तुम्हें आपस में जब कभी किसी से कोई कष्ट हो तो एक दूसरे की सहयोग और परस्पर एक दूसरे को मुक्त भाव से क्षमा कर दो तुम्हें आपस में एक दूसरे को ऐसे ही क्षमा करना चाहिए जैसे परमेश्वर ने तुम्हें मुक्त भाव से क्षमा कर दिया।

यह महामारी हमें दूसरों की तरह शोक ना करने में सक्षम बनाती है जिनके पास आशा नहीं है।

कोविड-19 एक हत्यारा है। इस महामारी के दौरान कई लोगों ने अपने प्रियजनों, मित्रों और सहकर्मियों को खो दिया है। कई लोगों ने अपनी नौकरी का भविष्य, स्वास्थ्य, बचत, और सुरक्षा खो दी है। आने वाले महीनों और वर्षों में दुखी होने के कई कारण होंगे। दुख एक भावना है उस पतन का परिणाम है, जिसे परमेश्वर ने मनुष्यों को प्रदान किया है। यह एक स्वस्थ भावना है। मसीही अपने नुकसान पर शोक करते हैं, लेकिन हमारा आशावान दुख है, जो निराशा से भरी दुनिया की गवाही देता है। हमारी आशा मसीह में रखी गई है। 1 थिस्सलुनीकियों 4:13-14 “हे भाईयों, हम चाहते हैं कोई जो चिर-निद्रा में सो गए हैं, तुम उनके विषय में भी जानो ताकि तुम्हें उन औरों के समान, जिनके पास आशा नहीं है, शोक न करना पड़े। 14 क्योंकि यदि हम यह विश्वास करते हैं कि यीशु की मृत्यु हो गयी और वह फिर से जी उठा, तो उसी प्रकार जिन्होंने उसमें विश्वास करते हुए प्राण त्याग दिए हैं, उनके साथ भी परमेश्वर वैसा ही करेगा। और यीशु के साथ वापस ले जायेगा।“

यह महामारी हमें चेतावनी देती है की हम पहले की तुलना में पाप को अधिक गंभीरता से लें।

बहुत से लोग यह मानते हैं कि परमेश्वर इस वायरस का उपयोग दुनिया को अपश्चातापी पाप का दंड देने के लिए कर रहें हैं। लेकिन मेरा मानना है कि कोविड-19 नैतिक बुराई के परिणाम के बजाय एक प्राकृतिक बुराई है। पतन के बाद से मानव जाति को श्राप दिया गया है और यह महामारी पाप से पीड़ित दुनिया में रहने के कई परिणामों में से एक है। परमेश्वर इस वर्तमान दुख का उपयोग कोई विशिष्ट पाप से पश्चाताप लाने के लिए कर सकते हैं, जो हमें उनके साथ पूर्ण सहभागिता से रोक रहा है। आइए हम संकट के इस समय का उपयोग अपने जीवन पर चिंतन करने और उन पापों को स्वीकार करने और पश्चाताप और त्यागने के लिए करें जो हमें गुलाम बनाए हुए है।

1यूहन्ना1:8-9

“यदि हम कहते हैं कि हममें कोई पाप नहीं है तो हम स्वयं अपने आपको छल रहे हैं और हममें सच्चाई नहीं है। यदि हम अपने पापों को स्वीकार कर लेते हैं तो हमारे पापों को क्षमा करने के लिए परमेश्वर विश्वसनीय है और न्यायपूर्ण है और समुचित है। तथा वह सभी पापों से हमें शुद्ध करता है।“

यह महामारी हमें मसीह की सच्चाई और महिमा की गवाही देने का अवसर देती है।

इस महामारी ने मसीह के शरीर को जो कलीसिया है; नमक और प्रकाश होने का एक अद्भुत अवसर प्रदान किया है।

यह समय है सेवा और आत्म बलिदान के कार्यों से मसीह के प्रेम को प्रकट करने का। जब भी कोई अविश्वासी एक विश्वासी को दूसरों की जरूरतों को अपने से पहले रखते हुए देखता है तो वह व्यक्ति यीशु के हाथों और पैरों को काम होते हुए देखता है और वह मसीह यीशु में बचाने वाले विश्वास में आ जाएगा।

 “तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें॥“ मती 5:14-16  

आइए हम इस महामारी की स्थिति को बर्बाद ना करें। हमारे परमेश्वर कभी कुछ भी व्यर्थ नहीं करते हैं। वह हमारे कड़वे जीवन के अनुभवों का उपयोग करते हैं। वह हमारी सभी असफलताओं, दर्द पीड़ा, और हानि का उपयोग हमारे भले के लिए कर सकते हैं। यीशु ने शिष्यों से कहा 5000 को खिलाकर सभी टूटे हुए रोटी के टुकड़े इकट्ठा कर लो। दुनिया टूटी-फूटी चीजों को फेंक देती है, लेकिन हमारा परमेश्वर उनका इस्तेमाल करते हैं। वह हमारी टूट-फूट का भी इस्तेमाल करते हैं। परमेश्वर इस महामारी की स्थिति का उपयोग हमारे अंत में हमारे अच्छे के लिए करने जा रहे हैं। वह कुछ भी व्यर्थ नहीं करते हैं।  

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